इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
अष्टभैरव ध्यानस्तोत्रम्’ भगवान शिव के आठ उग्र स्वरूपों, जिन्हें अष्टभैरव कहा जाता है, को समर्पित एक ध्यान और स्तुति ग्रंथ है। ये आठ भैरव आठ दिशाओं के रक्षक माने जाते हैं और उनके नाम हैं – असितांग, रुरु, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाल, भीषण, और संहार। इस स्तोत्र में प्रत्येक भैरव के ध्यान के लिए उनके स्वरूप, आयुध, वाहन और शक्तियों का काव्यात्मक वर्णन किया गया है, ताकि साधक उनका मानसिक चित्र बना सके। इसका पाठ भय, नकारात्मक शक्तियों और शत्रुओं से रक्षा के लिए किया जाता है।
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