इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
ऐतरेय ब्राह्मण’ ऋग्वेद की शाकल शाखा से संबंधित एक महत्वपूर्ण ब्राह्मण ग्रंथ है। ब्राह्मण ग्रंथ वेदों के गद्य भाग होते हैं, जिनमें वैदिक यज्ञों और अनुष्ठानों की विस्तृत व्याख्या की गई है। ‘ऐतरेय ब्राह्मण’ में सोमयज्ञ जैसे प्रमुख यज्ञों की विधियों, उनके पीछे के दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थों का वर्णन है। इसमें शुनःशेप की प्रसिद्ध कथा जैसे कई आख्यान भी शामिल हैं। यह ग्रंथ वैदिक कर्मकांड और उस काल की सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं को समझने के लिए एक अमूल्य स्रोत है।
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