इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन साधुओं द्वारा सहन किए जाने वाले ‘बाईस परीषहों’ का वर्णन करने वाला एक संग्रह है। ‘परीषह’ वे कष्ट या कठिनाइयाँ हैं जिन्हें जैन मुनि समता भाव से सहन करते हैं ताकि वे कर्मों का नाश कर सकें और अपने आत्म-ध्यान में स्थिर रह सकें। इनमें भूख, प्यास, सर्दी, गर्मी, और अपमान जैसी 22 कठिनाइयाँ शामिल हैं। यह कृति जैन तपस्या के कठोर मार्ग और आत्म-नियंत्रण के उच्चतम आदर्श को दर्शाती है।
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