इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
बृहत्-स्तोत्र-रत्नाकर’ का अर्थ है ‘स्तोत्र रूपी रत्नों का विशाल सागर’। यह हिंदू धर्म के विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित स्तोत्रों, प्रार्थनाओं और कवचों का एक व्यापक संग्रह है। इसमें गणेश, शिव, विष्णु, देवी, और सूर्य आदि के प्रसिद्ध और दुर्लभ स्तोत्र एक ही स्थान पर संकलित हैं। यह भक्तों और उपासकों के लिए दैनिक पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए एक अत्यंत मूल्यवान और लोकप्रिय ग्रंथ है।
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