इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“छन्दसूत्रम्”, जिसे “पिंगलसूत्र” भी कहा जाता है, आचार्य पिंगल द्वारा रचित छंद-शास्त्र का सबसे प्राचीन और आधारभूत ग्रंथ है। यह वेदांगों में से एक ‘छन्द’ का प्रतिनिधित्व करता है। यह ग्रंथ ‘सूत्र’ शैली में लिखा गया है, जिसमें अत्यंत संक्षिप्त नियमों के माध्यम से वैदिक और लौकिक संस्कृत के सभी छंदों की संरचना का गणितीय सटीकता के साथ विश्लेषण किया गया है। इसमें ‘गुरु’ और ‘लघु’ वर्णों के संयोजन से गण (तीन वर्णों का समूह) बनाने की प्रसिद्ध प्रणाली का आविष्कार किया गया है। यह न केवल भारतीय काव्यशास्त्र, बल्कि गणित और कंप्यूटर विज्ञान (द्विआधारी प्रणाली के लिए) के इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
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