इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
चौथमल विलास’ नामक यह ग्रंथ 20वीं सदी के प्रभावशाली जैन संत, ‘जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज’ के जीवन, उनके कार्यों और उनके प्रवचनों से संबंधित एक कृति का पहला खंड है। ‘विलास’ का अर्थ है महिमा या प्रकाश। इस पुस्तक में उनके सुधारवादी विचारों, उनकी ओजस्वी वाणी, और जैन समाज पर उनके गहरे प्रभाव का वर्णन हो सकता है। यह उनके अनुयायियों के लिए एक श्रद्धापूर्ण और प्रेरणादायक संकलन है।
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