इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘दिवाकर दिव्य ज्योति’ नामक प्रवचन श्रृंखला का पंद्रहवाँ भाग है। इसमें जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज जैसे किसी ‘दिवाकर’ उपाधिधारी संत के व्याख्यानों का संग्रह है। ‘सूर्य की दिव्य ज्योति’ के समान, ये प्रवचन अज्ञान और संदेह के अंधकार को दूर कर धर्म, नैतिकता और अध्यात्म का प्रकाश फैलाते हैं। यह खंड पाठकों को एक सदाचारी और आत्म-जागरूक जीवन जीने के लिए सरल और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करता है।
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