इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज के प्रवचनों की श्रृंखला ‘दिवाकर दिव्य ज्योति’ का तेरहवां भाग है। इस श्रृंखला में उनके द्वारा दिए गए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक व्याख्यानों को संकलित किया गया है। प्रत्येक भाग में धर्म, नैतिकता, सामाजिक सुधार और आत्म-कल्याण जैसे विषयों पर उनके ओजस्वी विचारों का संग्रह है। यह तेरहवां खंड भी उसी ज्ञान-गंगा को आगे बढ़ाता है, जो उनके अनुयायियों और पाठकों को आध्यात्मिक प्रकाश और सही जीवन-दृष्टि प्रदान करता है।
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