इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक संभवतः जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्व ‘संवत्सरी’ से संबंधित ‘गाथाओं’ या काव्यों का एक संग्रह है। संवत्सरी क्षमापना का दिन है, और ये गाथाएँ क्षमा, मैत्री, और आत्म-शुद्धि की भावना को व्यक्त कर सकती हैं। वैकल्पिक रूप से, यह एक वार्षिक साहित्यिक संकलन भी हो सकता है, जिसमें वर्ष भर की श्रेष्ठ रचनाओं को संग्रहित किया गया हो। इसका स्वरूप जैन परंपरा के संदर्भ में अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है।
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