इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘जैन स्तोक मंजूषा’ का दसवाँ भाग है। ‘स्तोक’ या ‘थोकड़ा’ जैन सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से प्रश्नोत्तर या सारणी के रूप में याद करने की एक पारंपरिक विधि है। ‘मंजूषा’ का अर्थ है एक पिटारी। यह कृति जैन धर्म के विभिन्न विषयों पर आधारित ‘स्तोकों’ की एक रत्न-पिटारी है, जिसे विशेष रूप से स्वाध्याय करने वालों के लिए जैन दर्शन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से और व्यवस्थित रूप से सीखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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