इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म के प्राचीन इतिहास की एक व्यापक पृष्ठभूमि (पूर्व पीठिका) प्रस्तुत करती है और वर्तमान समय में जैन समाज के पुनरुत्थान (अभ्युत्थान) का आह्वान करती है। इसमें भगवान महावीर से लेकर बाद के आचार्यों तक के इतिहास, जैन धर्म के प्रसार और उसकी चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। लेखक ने अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने और शिक्षा तथा संगठन के माध्यम से भविष्य को उज्ज्वल बनाने पर जोर दिया है।
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