इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर, भगवान ‘चन्द्रप्रभ’ के जीवन-चरित्र पर आधारित ‘पुराण’ का भाषा-अनुवाद या सरल गद्य रूपांतरण है। मूल पुराण संस्कृत या प्राकृत में हो सकता है। इस पुस्तक में भगवान चन्द्रप्रभ के जन्म से लेकर उनके राज-पाट, वैराग्य, तपस्या और मोक्ष तक की संपूर्ण कथा का भक्तिपूर्ण वर्णन है। यह उनके अनुयायियों को अपने आराध्य तीर्थंकर के आदर्श जीवन से परिचित कराती है और उन्हें धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
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