इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह दिगंबर जैन परंपरा के सर्वोच्च और सबसे प्राचीन आगम ग्रंथ ‘षट्खंडागम’ का चौथा खंड है। आचार्य पुष्पदंत और भूतबलि द्वारा रचित इस विशाल ग्रंथ में जैन कर्म सिद्धांत और सत्ता मीमांसा का अत्यंत सूक्ष्म और गहन विवेचन है। यह चौथा खंड, जिसे ‘वेदना खंड’ कहा जाता है, कर्मों के उदय से जीव द्वारा अनुभव की जाने वाली सुख-दुःख रूपी वेदना का विस्तृत विश्लेषण करता है। यह जैन सिद्धांत का एक बहुत ही उन्नत और तकनीकी ग्रंथ है।
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