इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक संस्कृत व्याकरण की जैनेन्द्र परंपरा पर आधारित एक कृति है। आचार्य देवनन्दी (पूज्यपाद) द्वारा रचित ‘जैनेन्द्र व्याकरण’ पाणिनीय व्याकरण की तुलना में अधिक संक्षिप्त और सुगम माना जाता है, विशेषकर जैन विद्वानों के बीच। ‘जैनेन्द्र प्रक्रिया’ संभवतः इस व्याकरण के सूत्रों को व्यवस्थित रूप से समझने और उनका अभ्यास करने की एक प्रक्रिया या पद्धति प्रस्तुत करती है। यह संस्कृत व्याकरण और विशेष रूप से जैन संस्कृत साहित्य का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण पाठ है।
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