इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
मरणकंडिका’ का अर्थ है ‘मृत्यु पर अध्याय’। यह जैन धर्म में ‘सल्लेखना’ या ‘समाधि-मरण’ की विधि पर एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें यह बताया गया है कि कैसे एक श्रावक या मुनि जीवन के अंत में सभी इच्छाओं का त्याग कर, शांति और समता भाव के साथ स्वेच्छा से मृत्यु का वरण करता है। यह कायरतापूर्ण आत्महत्या नहीं, बल्कि जीवन भर की साधना की अंतिम परीक्षा और एक आध्यात्मिक विजय मानी जाती है।
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