इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
मुण्डकोपनिषद्’ अथर्ववेद से संबंधित एक प्रमुख उपनिषद् है। यह परा (आध्यात्मिक) और अपरा (सांसारिक) विद्या के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। इसमें ‘अक्षर ब्रह्म’ (अविनाशी परमात्मा) के स्वरूप का सुंदर वर्णन है और यह बताया गया है कि उस परब्रह्म को केवल कोरे ज्ञान या कर्मकांड से नहीं, बल्कि सत्य, तप और ब्रह्मचर्य से ही जाना जा सकता है। भारत का राष्ट्रीय आदर्श-वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ इसी उपनिषद् से लिया गया है। यह वेदांत दर्शन का एक महत्वपूर्ण और गहन ग्रंथ है।
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