इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक विशिष्ट धार्मिक विषय पर एक ग्रंथ है। ‘निर्माल्य’ का अर्थ है पूजा में देवताओं को अर्पित करने के बाद उतारी गई वस्तुएँ (जैसे फूल, प्रसाद)। ‘द्रव्य-चर्चा’ का अर्थ है ‘पदार्थों पर चर्चा’। यह पुस्तक संभवतः जैन या हिंदू परंपरा में इस बात पर चर्चा करती है कि ‘निर्माल्य’ का क्या किया जाना चाहिए, कौन से ‘द्रव्य’ पूजा के योग्य हैं और कौन से नहीं, और इन सबके पीछे क्या आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक अर्थ हैं।
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