इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘पंचसंग्रह’ प्राकृत भाषा में लिखा गया एक महत्वपूर्ण दिगंबर जैन ग्रंथ है, जो कर्म सिद्धांत पर केंद्रित है। जैसा कि नाम से पता चलता है, यह पाँच अध्यायों या ‘द्वारों’ का एक ‘संग्रह’ है, जिसमें कर्मों की प्रकृति, उनके बंध, उदय, और सत्ता का अत्यंत व्यवस्थित और गणितीय विश्लेषण किया गया है। यह ‘षट्खंडागम’ और ‘कषायपाहुड’ जैसे विशाल ग्रंथों के बाद कर्म सिद्धांत का अध्ययन करने के लिए एक प्रमुख ग्रंथ है।
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