इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महात्मा गांधी द्वारा दिए गए ‘प्रार्थना प्रवचनों’ के संग्रह का दूसरा भाग है। गांधीजी के लिए, प्रार्थना सभाएँ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और जन-संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम थीं। इन प्रवचनों में वे धर्म, नैतिकता, सत्य, अहिंसा, और समसामयिक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपने विचार सरल और सीधी भाषा में रखते थे। यह पुस्तक गांधीजी के आध्यात्मिक और नैतिक चिंतन को समझने के लिए एक अमूल्य स्रोत है।
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