इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“साहित्य मीमांसा” का अर्थ है “साहित्य का गहन और आलोचनात्मक विश्लेषण”। यह पुस्तक साहित्य के स्वरूप, उसके उद्देश्य, और उसके मूल्यांकन के सिद्धांतों पर एक विवेचनात्मक कृति है। यह भारतीय काव्यशास्त्र या पाश्चात्य साहित्य-सिद्धांत (Literary Theory) पर आधारित हो सकती है। इसमें ‘साहित्य क्या है?’, ‘कविता और गद्य में क्या अंतर है?’, ‘साहित्य का समाज से क्या संबंध है?’, और ‘एक अच्छी कृति के क्या मापदंड हैं?’ जैसे मौलिक प्रश्नों पर विचार किया गया होगा। इसमें विभिन्न साहित्यिक वादों (जैसे- रस, अलंकार, यथार्थवाद, या उत्तर-आधुनिकतावाद) का परिचय और विश्लेषण भी हो सकता है। यह साहित्य के गंभीर छात्रों और आलोचकों के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।