इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
पुष्पदन्त और भूतबलि आचार्यों द्वारा रचित ‘षट्खंडागम’ दिगंबर जैन परंपरा का सर्वोच्च और सबसे प्राचीन आगम ग्रंथ है। यह छह खंडों में विभाजित है और इसमें जैन दर्शन के सबसे गहन और जटिल विषयों, विशेष रूप से कर्म सिद्धांत और जीव के विभिन्न पहलुओं का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया गया है। यह ग्रंथ भगवान महावीर की मूल शिक्षाओं पर आधारित माना जाता है। इसकी भाषा और विषय-वस्तु की गहनता के कारण, यह मुख्य रूप से विद्वानों और उन्नत साधकों द्वारा अध्ययन किया जाता है। यह जैन सिद्धांत का एक आधार स्तंभ है।
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