इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
शिवानन्दलहरी’ (शिव के आनंद की लहरें) आदि शंकराचार्य द्वारा रचित भगवान शिव को समर्पित एक सौ श्लोकों का भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भक्ति-रस से ओतप्रोत है और इसमें कवि ने विभिन्न उपमाओं और अलंकारों के माध्यम से शिव की महिमा, उनके स्वरूप और उनके प्रति अपनी अनन्य भक्ति को व्यक्त किया है। यह कृति अद्वैत वेदांत के महान आचार्य की गहन शिव-भक्ति का प्रमाण है। अपनी काव्यात्मक सुंदरता, संगीतात्मकता और गहरी भक्ति भावना के कारण यह शैव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
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