इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
अभिधान राजेन्द्र कोष’ जैन धर्म का एक विशाल और विश्वकोशीय ग्रंथ है, जिसे आचार्य राजेन्द्रसूरि जी ने संकलित किया था। यह तीसरा खंड उसी महान कोष का एक हिस्सा है। यह प्राकृत, संस्कृत और मागधी भाषाओं के लाखों शब्दों का एक संग्रह है, जिनके अर्थ, संदर्भ और शास्त्रीय व्याख्याएं दी गई हैं। यह केवल एक शब्दकोश नहीं, बल्कि जैन दर्शन, साहित्य, इतिहास और संस्कृति का एक अथाह सागर है। यह विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए एक अनिवार्य और अमूल्य संदर्भ ग्रंथ है।
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