इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन श्वेतांबर आगम साहित्य के एक प्रमुख मूलसूत्र, ‘दशवैकालिक सूत्र’ का ‘हिंदी अनुवाद’ है। इसकी रचना आचार्य शय्यंभव ने अपने पुत्र को शीघ्र साधु-धर्म की शिक्षा देने के लिए की थी। यह जैन मुनियों के आचार और विनय के नियमों पर एक संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित ग्रंथ है। यह हिंदी अनुवाद इस महत्वपूर्ण आगम ग्रंथ की शिक्षाओं को आम पाठकों और स्वाध्याय करने वालों के लिए सुलभ बनाता है।
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