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श्री जिनाज्ञा-विधि-प्रकाश [प्रथम प्रकाश] - Shri Jinagya Vidhi Prakash [Pratham Prakash] - Book
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श्री जिनाज्ञा-विधि-प्रकाश [प्रथम प्रकाश] – Shri Jinagya Vidhi Prakash [Pratham Prakash] – Book

Pages
180 Pages
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8 MB
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इस पुस्तक के विषय

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पुस्तक विवरण

श्री जिनाज्ञा-विधि-प्रकाश’ का अर्थ है ‘जिन (तीर्थंकर) की आज्ञा के अनुसार विधियों पर प्रकाश’। यह एक जैन ग्रंथ का पहला ‘प्रकाश’ (अध्याय) है, जो श्रावकों और साधुओं द्वारा किए जाने वाले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और क्रियाओं की ‘विधि’ का वर्णन करता है। यह कृति यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि सभी धार्मिक क्रियाएँ शास्त्रों और तीर्थंकरों की आज्ञा के अनुसार ही संपन्न हों। यह जैन आचार-विचार पर एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है।

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