इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह श्वेतांबर जैन आगम साहित्य के दस प्रकीर्णक सूत्रों में से एक है। ‘प्रश्न व्याकरण सूत्र’ में प्रश्नोत्तर शैली में अच्छे और बुरे कर्मों (आस्रव और संवर) के परिणामों का विस्तृत वर्णन है। इसमें अहिंसा, सत्य जैसे व्रतों के पालन से होने वाले लाभ और हिंसा, झूठ आदि पापों से होने वाली हानियों को नाटकीय और प्रभावशाली ढंग से समझाया गया है, ताकि साधक पापों से दूर रहकर धर्म में स्थिर रह सकें।
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