इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“श्री ऋग्विधानम्” ऋग्वेद से जुड़ा एक महत्वपूर्ण परिशिष्ट (ancillary text) ग्रंथ है। इसका मुख्य उद्देश्य ऋग्वेद के विभिन्न सूक्तों और मंत्रों के पाठ से प्राप्त होने वाले विशिष्ट फलों (परिणामों) का विधान करना है। यह ग्रंथ बताता है कि किस विशेष इच्छा की पूर्ति, किस रोग के निवारण, या किस संकट से मुक्ति के लिए ऋग्वेद के कौन से मंत्र का किस विधि से जाप करना चाहिए। यह एक प्रकार से वैदिक मंत्रों की व्यावहारिक और अनुष्ठानात्मक कुंजी है, जो उन्हें केवल यज्ञीय कर्मकांड तक सीमित न रखकर, व्यक्ति के दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रस्तुत करती है। यह वैदिक परंपरा के फलित (practical application) पक्ष को दर्शाता है।
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