इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“श्री ऋषिमंडल वृत्ति” एक जैन धार्मिक ग्रंथ है, जो ‘ऋषिमंडल स्तोत्र’ पर एक ‘वृत्ति’ या टीका (commentary) है। ‘ऋषिमंडल स्तोत्र’ एक अत्यंत शक्तिशाली और पूजनीय स्तोत्र है जिसमें गौतम स्वामी से लेकर अंतिम श्रुतकेवली तक के महान ऋषियों की वंदना की गई है। यह वृत्ति मूल स्तोत्र के प्रत्येक पद और मंत्र के अर्थ को विस्तार से समझाती है, उसमें वर्णित ऋषियों के जीवन और उनकी साधना पर प्रकाश डालती है, और स्तोत्र के पाठ से होने वाले लाभों और उसकी सही विधि का वर्णन करती है। यह जैन अनुयायियों के लिए अपने महान आचार्यों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनके जीवन से प्रेरणा लेने के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
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