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श्री सूत्रकृतांग सूत्रम [भाग 4] - Shri Sutrakritang Sutram [Bhag 4] - Book
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श्री सूत्रकृतांग सूत्रम [भाग 4] – Shri Sutrakritang Sutram [Bhag 4] – Book

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पुस्तक विवरण

यह जैन श्वेतांबर आगम के बारह अंगों में से दूसरे, ‘सूत्रकृतांग सूत्र’ का चौथा भाग है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसमें जैन साधुओं के आचार-विचार और परीषहों को सहन करने का वर्णन है। इसकी एक और प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें उस समय प्रचलित अन्य दार्शनिक मतों (जैसे क्रियावाद, अक्रियावाद) का विस्तृत विश्लेषण और जैन दृष्टिकोण से उनका खंडन किया गया है। यह जैन दर्शन की श्रेष्ठता को स्थापित करने वाला एक प्रमुख ग्रंथ है।

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