इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और सर्वमान्य ग्रंथ, आचार्य उमास्वाति द्वारा रचित ‘तत्त्वार्थसूत्र’ पर आधारित एक ‘शतक’ रचना है। ‘शतक’ का अर्थ है सौ पद्यों की रचना। इसमें ‘तत्त्वार्थसूत्र’ के गूढ़ सूत्रों के सार को सौ सरल और काव्यात्मक पद्यों में प्रस्तुत किया गया है, ताकि अनुयायी इसे आसानी से कंठस्थ कर सकें और इसके सिद्धांतों का चिंतन कर सकें। यह कृति मोक्षमार्ग के सात तत्त्वों—जीव, अजीव, आस्रव, बंध, संवर, निर्जरा, और मोक्ष—को सुगमता से समझने का एक उत्तम माध्यम है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।