इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
सूत्र कृतांग’ (सूत्र कृत) जैन धर्म के बारह प्रमुख आगमों में से दूसरा आगम है। यह ग्रंथ ज्ञान और क्रिया के संबंध पर जोर देता है, अर्थात सच्चा ज्ञान वही है जो सही आचरण में उतरे। इस पुस्तक में अन्य दार्शनिक मतों की समीक्षा करते हुए जैन सिद्धांतों की स्थापना की गई है। यह साधकों को पाखंड और मिथ्या धारणाओं से सावधान करती है और सम्यक् ज्ञान के साथ सम्यक् क्रिया (आचरण) का पालन करने के लिए प्रेरित करती है। यह जैन दर्शन का एक महत्वपूर्ण और गहन ग्रंथ है।
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