इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“श्री दुर्गा सहस्त्रनामावली” देवी दुर्गा के एक हजार नामों का एक स्तोत्र-संग्रह है। ‘सहस्र’ का अर्थ है हजार और ‘नामावली’ का अर्थ है नामों की सूची। यह ग्रंथ शाक्त परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसमें देवी के प्रत्येक नाम का पाठ या श्रवण करने का विधान है, क्योंकि प्रत्येक नाम उनके एक विशिष्ट गुण, स्वरूप, शक्ति या लीला का प्रतीक है। यह पुस्तक भक्तों को देवी के अनंत स्वरूपों का स्मरण करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम प्रदान करती है। नवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर इसका पाठ करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यह देवी के प्रति भक्ति और श्रद्धा को गहरा करने वाली एक पवित्र कृति है।
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