इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
सुभाषितत्रिशती’ राजा भर्तृहरि द्वारा रचित तीन प्रसिद्ध शतकों – ‘नीति शतक’, ‘श्रृंगार शतक’, और ‘वैराग्य शतक’ – का संयुक्त संग्रह है। ‘त्रिशती’ का अर्थ है तीन सौ (प्रत्येक में लगभग सौ श्लोक)। ये श्लोक संस्कृत काव्य के अनमोल रत्न हैं, जो क्रमशः जीवन के लिए नीतिपूर्ण उपदेश, प्रेम और सौंदर्य के मनमोहक चित्र, और संसार की नश्वरता पर गहन वैराग्यपूर्ण चिंतन प्रस्तुत करते हैं। यह एक ही ग्रंथ में मानव-जीवन के तीन प्रमुख पक्षों का अद्भुत काव्यात्मक दर्शन है।
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