इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महाकवि भर्तृहरि द्वारा रचित ‘त्रिशतक’ (तीन शतकों का संग्रह) का एक हिस्सा है। ‘वैराग्य शतक’ में सौ श्लोकों के माध्यम से संसार की नश्वरता, इच्छाओं के बंधन, और ‘वैराग्य’ या सांसारिक मोह से अनासक्ति के महत्व का अत्यंत प्रभावशाली और काव्यात्मक वर्णन है। यह कृति पाठकों को भोग-विलास की निरर्थकता पर विचार करने और आध्यात्मिक शांति तथा मोक्ष के मार्ग की ओर उन्मुख होने के लिए प्रेरित करती है।
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