इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक संत-कवि कबीर की रचनाओं में पाए जाने वाले रहस्यवादी (Mystical) तत्वों का एक गहन दार्शनिक विश्लेषण है। इसमें कबीर के निर्गुण ब्रह्म, आत्मा-परमात्मा के संबंध, उनकी उलटबाँसियों और प्रतीकात्मक भाषा के गूढ़ अर्थों की विवेचना की गई है। लेखक ने यह दर्शाया है कि कैसे कबीर ने योग, सूफीमत और वेदांत के विचारों को मिलाकर एक अनूठा रहस्यवादी दर्शन प्रस्तुत किया। यह हिंदी साहित्य और भारतीय दर्शन के गंभीर अध्येताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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