इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक सामाजिक व्यंग्य या कहानी संग्रह हो सकता है, जो समाज में ‘छोटे’ (आम) और ‘बड़े’ (खास) लोगों के बीच के अंतर, उनके व्यवहार और उनकी मानसिकता को दर्शाता है। इसमें ऐसी कहानियाँ हो सकती हैं जो दिखाती हैं कि कैसे पद और पैसे के आधार पर लोगों का मूल्य आंका जाता है, और कैसे कभी-कभी तथाकथित ‘छोटे’ लोग भी अपने कर्मों और विचारों में बहुत ‘बड़े’ होते हैं। यह कृति मानवीय स्वभाव और सामाजिक पाखंड पर एक गहरी टिप्पणी है।
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