इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन कथा-साहित्य से ली गई ‘सकडाल पुत्र’ नामक एक आदर्श ‘श्रावक’ (गृहस्थ अनुयायी) की प्रेरणादायक कहानी है। सकडालपुत्र पेशे से एक कुम्हार थे, लेकिन भगवान महावीर में उनकी श्रद्धा अटूट थी। यह कथा उनकी धर्म-निष्ठा, उनकी परीक्षा और उनके द्वारा प्राप्त की गई आध्यात्मिक उन्नति का वर्णन करती है। यह कहानी सिखाती है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पेशे या जाति का हो, सच्ची श्रद्धा से धर्म का पालन कर सकता है।
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