इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक साहित्यिक-आलोचनात्मक ग्रंथ है, जो साहित्य और कला में ‘प्रतीक’ (Symbol) के प्रयोग के ‘उद्गम’ और ‘विकास’ का अध्ययन करता है। इसमें यह विश्लेषण किया गया है कि प्रतीक क्या होते हैं, वे कैसे बनते हैं, और विभिन्न साहित्यिक आंदोलनों (जैसे- छायावाद, प्रतीकवाद) में उनकी क्या भूमिका रही है। यह कृति साहित्य के छात्रों और शोधकर्ताओं को काव्य और कला के एक महत्वपूर्ण उपकरण को समझने में मदद करती है।
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