इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 18वीं सदी के दिल्ली के प्रसिद्ध संत, स्वामी चरणदास जी की ‘बानी’ (उपदेशों और काव्य-रचनाओं) के संग्रह का दूसरा भाग है। स्वामी चरणदास जी ने अपनी सरल और मधुर बानी के माध्यम से योग, भक्ति और ज्ञान का समन्वय प्रस्तुत किया। उनकी रचनाएँ सामाजिक सद्भाव और नैतिक आचरण पर जोर देती हैं। यह दूसरा खंड भी उनकी अमृतमयी वाणी को प्रस्तुत करता है, जो साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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