इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता कुँवर नारायण की एक महत्वपूर्ण और दार्शनिक लंबी कविता या काव्य-कृति है। ‘क्वासि’ का अर्थ है ‘लगभग’ या ‘मानो’। यह शीर्षक ही अस्तित्व की अनिश्चितता और ambiguity की ओर संकेत करता है। यह कृति आत्म-निर्वासन, इतिहास, और आधुनिक मनुष्य के अस्तित्वगत संकट जैसे विषयों पर एक गहरा चिंतन है। यह अपनी जटिल संरचना और बौद्धिक गहराई के लिए जानी जाती है और आधुनिक हिंदी कविता की एक मील का पत्थर है।
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