इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
श्री घासीलाल व्रति की टीका के साथ, यह ‘जीवाभिगम सूत्र’ का पहला भाग है, जो जैन आगम के ‘उपांग’ सूत्रों में से एक है। यह सूत्र विशेष रूप से ‘जीव’ (living beings) के वर्गीकरण और उनके विभिन्न स्वरूपों का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें एकेन्द्रिय से लेकर पंचेन्द्रिय तक के जीवों, उनके निवास स्थान, आयु और गतियों का वैज्ञानिक और सूक्ष्म विश्लेषण है। यह जैन ब्रह्मांड विज्ञान और जीव विज्ञान का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह टीका मूल सूत्र के तकनीकी और गहन विवरण को पाठकों के लिए सुलभ बनाती है।
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