इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
गैर्वाणी’ संस्कृत भाषा में प्रकाशित होने वाली एक पत्रिका है, और यह उसका 15 फरवरी 1970 का अंक है। ‘गैर्वाणी’ का अर्थ है ‘देवताओं की वाणी’, जो संस्कृत भाषा के लिए एक सम्मानजनक संबोधन है। इस पत्रिका का उद्देश्य संस्कृत भाषा और साहित्य को जीवित रखना और समकालीन विषयों पर संस्कृत में लेखन को बढ़ावा देना है। इस अंक में संस्कृत में लिखी गई कविताएँ, लघु कथाएँ, समसामयिक घटनाओं पर लेख, और शास्त्रीय विषयों पर विद्वानों के शोधपत्र शामिल हो सकते हैं। यह संस्कृत के प्रचार-प्रसार में लगी एक महत्वपूर्ण पत्रिका है, जो इस प्राचीन भाषा को आधुनिक दुनिया से जोड़ने का प्रयास करती है।
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