इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“गैर्वाणी”, जिसका अर्थ है ‘देवताओं की वाणी’ अर्थात संस्कृत, संस्कृत भाषा को समर्पित एक पत्रिका है। यह 15 नवंबर का अंक उस समय के संस्कृत जगत की साहित्यिक और बौद्धिक गतिविधियों का एक प्रतिबिंब है। इसमें समकालीन कवियों द्वारा रचित संस्कृत कविताएँ, लघु कथाएँ, और विभिन्न विषयों पर लिखे गए विद्वत्तापूर्ण लेख शामिल हो सकते हैं। पत्रिका का एक मुख्य उद्देश्य सरल संस्कृत में सामग्री प्रस्तुत करके इसे आम पाठकों के लिए भी सुलभ बनाना था। यह अंक संस्कृत भाषा के प्रति प्रेम रखने वालों के लिए एक मूल्यवान संग्रह है, जो इसकी निरंतर प्रवाहमान परंपरा को दर्शाता है।
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