इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक बीसवीं सदी में हिंदी नाटक के विकास और उसकी प्रमुख प्रवृत्तियों का एक आलोचनात्मक अध्ययन है। इसमें जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक नाटकों से लेकर मोहन राकेश और धर्मवीर भारती के आधुनिक बोध के नाटकों तक की यात्रा का विश्लेषण किया गया है। यह कृति आधुनिक नाटकों की विषय-वस्तु, उनके शिल्प, रंगमंच पर उनके प्रभाव और प्रमुख नाटककारों के योगदान पर प्रकाश डालती है। यह हिंदी साहित्य और रंगमंच के छात्रों तथा अध्येताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।
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