इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक साहित्यिक आलोचना की पुस्तक है जो हिंदी की ‘आधुनिक काव्यधारा’ के ‘सांस्कृतिक स्रोतों’ की पड़ताल करती है। इसमें लेखक यह विश्लेषण करता है कि आधुनिक हिंदी कविता, जैसे छायावाद, प्रगतिवाद और प्रयोगवाद, पर भारतीय और पश्चिमी दर्शन, सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों और बदलती सांस्कृतिक मूल्यों का क्या प्रभाव पड़ा। यह कृति कविता को केवल साहित्यिक रचना के रूप में नहीं, बल्कि उसे अपने समय के सांस्कृतिक मंथन की अभिव्यक्ति के रूप में देखती है।
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