इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक भारतीय साहित्य की विशाल और विविध परंपरा के भीतर बहने वाली सांस्कृतिक एकता की धाराओं (रेखाओं) की खोज करती है। इसमें लेखक ने यह दर्शाया है कि कैसे विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों के साहित्य में एक समान सांस्कृतिक मूल्य, दार्शनिक चिंतन और नैतिक आदर्श परिलक्षित होते हैं। यह कृति ‘अनेकता में एकता’ के भारतीय सिद्धांत को साहित्य के माध्यम से सिद्ध करती है। यह भारतीय संस्कृति और साहित्य के अंतर्संबंधों को समझने के लिए एक गहन और विचारोत्तेजक अध्ययन है।
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