इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक 18वीं शताब्दी के प्रख्यात संत चरणदास जी की ‘बानी’ या उपदेशों और काव्यों का दूसरा भाग है। संत चरणदास जी ने अपनी रचनाओं में योग, भक्ति और ज्ञान के समन्वय पर जोर दिया। उनकी बानी सरल, सीधी और लोकभाषा में है, जो आम आदमी को भी गहरे आध्यात्मिक सत्य समझाती है। इस संग्रह में उनके दोहे, पद और अन्य रचनाएँ शामिल हैं, जो पाठकों को नैतिक जीवन जीने और आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन करती हैं।
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