इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
गल्प-गुच्छ’ का अर्थ है ‘कहानियों का गुच्छा’। यह संभवतः गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध बंगाली कहानी-संग्रह ‘गल्पगुच्छ’ का हिंदी अनुवाद का पहला भाग है। टैगोर अपनी कहानियों में मानवीय संबंधों, सामाजिक मुद्दों और मानव-मन की गहराइयों का अत्यंत संवेदनशील और काव्यात्मक चित्रण करने के लिए जाने जाते हैं। यह संग्रह पाठकों को विश्व-साहित्य की कुछ बेहतरीन कहानियों का रसास्वादन करने का अवसर प्रदान करता है।
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