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कसाय पाहुड [भाग 13] - Kasaya-Pahudam [Bhag 13] - Book
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कसाय पाहुड [भाग 13] – Kasaya-Pahudam [Bhag 13] – Book

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पुस्तक विवरण

गुणधराचार्य द्वारा रचित ‘कसाय पाहुड’ (कषाय प्राभृत) जैन कर्म-सिद्धांत पर एक अत्यंत गहन और मौलिक ग्रंथ है। यह मुख्य रूप से आत्मा को मैला करने वाले कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) का सूक्ष्मता से विश्लेषण करता है। यह दिगंबर जैन परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण आगम ग्रंथों में से एक है। तेरहवां भाग इसी जटिल विषय की गहराई में उतरता है, जिसमें कर्मों के बंध, उनकी विभिन्न प्रकृतियों और उनके उदय की प्रक्रिया का गणितीय और दार्शनिक विवेचन है। यह जैन दर्शन के गंभीर विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।

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