इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
गुणधराचार्य द्वारा रचित ‘कसाय पाहुडं’ (कषाय प्राभृत) जैन आगम साहित्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गहन ग्रंथ है। यह कर्म सिद्धांत के अंतर्गत ‘कषाय’ (क्रोध, मान, माया, लोभ) की प्रकृति, उनके कारण, परिणाम और उनसे मुक्ति के उपायों का सूक्ष्मता से विश्लेषण करता है। यह ग्रंथ दिगंबर जैन परंपरा के प्रमुख सिद्धांतों में से एक है। नौवां भाग इसी गहन विषय की चर्चा को आगे बढ़ाता है, जिसमें कर्मों के बंध और आत्मा पर उनके प्रभाव की जटिल प्रक्रियाओं का वर्णन है। यह जैन दर्शन के गंभीर अध्येताओं के लिए एक आवश्यक कृति है।
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